14 जुलाई 2014 - 14:44
इंसानी ज़िदगी।

इमाम अली अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैः लोग दुनिया में उन यात्रियों की तरह हैं जिन्हों सुस्ताने के लिए पड़ाव डाला हो और उन्हें यह पता न हो कि कब प्रस्थान की पुकार हो जाए।

इमाम अली अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैः लोग दुनिया में उन यात्रियों की तरह हैं जिन्हों सुस्ताने के लिए पड़ाव डाला हो और उन्हें यह पता न हो कि कब प्रस्थान की पुकार हो जाए।